Rajasthan Election 2023 करणपुर का Titar Singh ओल्ड़मैन तो सुपरमैन से भी उपर निकला, एक नहीं दो नहीं, बल्कि 31 बार उतर चुका चुनावी मैदान में, चुनावी एजेंडे सुन रह जायेंगे हैरान
The Blue Tick : Rajasthan Election 2023 चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने तो ना जाने कितने उम्मीदवार मैदान में आते हैं, लेकिन सोच कर देखिये आप एक चुनाव लड़े और हार जाएं, इसके बाद दूसरा लड़ेंगे, तीसरा लड़ेंगे, चौथा लड़ेंगे, लेकिन सोच कर देखिये ऐसे पूरे 31 चुनाव आप लड़ चुके हो और आपको आस 32वें पर हो तो हैं ना हिम्मत की बात।
72 वर्ष की उम्र में 32वीं बार चुनाव लड़ने के लिए नोमिनेशन फाइल कर दिया
जब देश में चुनाव चल रहे हैं, तो राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी रोचक कहानियां आपने सामने ना आएं, ऐसा भला कैसे हो सकता है। आज हम आपको एक ऐसी ही शख्स से रुबरु करवायेंगे, जिसने एक नहीं, दो नहीं बल्कि पूरे 31 चुनाव लड़े हैं और फिलहाल इस बार राजस्थान से 32वीं बार चुनाव लड़ने के लिए नामांकन कर दिया है। राजस्थान के माटी के लाल तीतर सिंह ने 72 वर्ष की उम्र में 32वीं बार चुनाव लड़ने के लिए नोमिनेशन फाइल कर दिया है। 1970 के दशक से लेकर अब तक, तीतर सिंह ने ग्राम पंचायत से लोकसभा तक 31 चुनाव लड़े हैं और हर बार हार गए हैं। इसके बावजूद, उनके उत्साह और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।
तीतर सिंह कोई करोड़पति व्यक्ति नहीं
तीतर सिंह कोई करोड़पति व्यक्ति नहीं हैं जो पचास वर्षों से चुनावों में अपने आपको स्थापित करने के लिए पैसा बहा रहे हो। वो साधारण से हैं, लेकिन इनका हौंसला पहाड़ जैसा मजबूत है। आपको उनकी दिलचस्प राजनीतिक कहानी हैरान कर देगी। तीतर सिंह दिन भर काम करते हैं। राजस्थान के गंगानगर जिले में रहकर उन्होंने बड़े-बड़े राजनीतिक सूरमाओं का सामना करा हैं, हर बार इन्होंने सामने वाले को ही चैलेंज दिया है। 31 बार हारने के बावजूद इनका हौंसला नहीं डगमगाया। फिलहाल ये करणपुर विधानसभा सीट से विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं।
एरिया में वो मशहूर हैं
करणपुर के छोटे से गांव में रहने वाले तीतर सिंह की उम्र चुनाव लड़ते-लड़ते ही बीती हैं। पूरे एरिया में वो मशहूर हैं, तीतर सिंह ने अब तक दस लोकसभा, दस विधानसभा, चार जिला परिषद डायरेक्टर, चार सरपंची और चार वार्ड मेंबरी चुनाव लड़े है। हालांकि उनके मुख्य एजेंडे की बात करे तो जिन अधिकारों की लड़ाई में वे पिछले पचास वर्षों से चुनावी अखाड़े में लड़ रहे हैं, उन्हें अब तक नहीं मिल सका।
बुलंद आवाज में विनम्रता से उत्तर देते
बातचीत के दौरान तीतर सिंह अपने लक्ष्य के बारे में जिक्र करते हुए कहते हैं कि चुनाव लड़ना उनके लिए प्रसिद्धि बटोरने या रिकॉर्ड बनाने का साधन नहीं है, बल्कि अपने लक्ष्यों को हासिल करने का एक हथियार है, जो समय और उम्र बीतने के बाद भी टिकेगा, उनका ये लक्ष्य तब तक हैं, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती। जब पत्रकार उनसे चुनावी सीजन में बार-बार एक ही सवाल पूछते हैं, तो वे इरीटेट नहीं होते। बुलंद आवाज में विनम्रता से उत्तर देते हुए, वे कहते हैं कि सरकार उन्हें जमीन दें, सभी तरह की मूलभूत अधिकार और सुख-सुविधाएं दें। ये मांग उनकी कोई गलत नहीं हैं, इसलिए वे ऐसी नाजायज मांग नहीं करते। यह हक की लड़ाई है। इसलिए वे चुनाव लड़ते रहेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती।

